Tuesday, 18 June 2019

Christian Hospital - Justice Awaited

जैसा कि आप जानते है कि भारत में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 23%से ज्यादा लोग गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन यापन करते है।शायद सही आंकड़े इससे भी ज्यादा हो।
आजादी के पहले से ही पूरे विश्व से बहुत सी समाज सेवी संस्थाएं एवम एनजीओ इस देश के गरीबों का जीवन स्तर सुधारने एवम उन्हें शिक्षा एवम स्वास्थ्य सेवाए देने के लिए यहां काम करती रही है।
ऐसी ही एक संस्था है Interserve USA (interserveusa.org)। जो कि अमेरिका की एक विश्व स्तरीय संस्था है जो 13 से भी ज्यादा देशों में गरीबों का जीवन स्तर सुधारने एवम उन्हें स्वास्थ्य एवम शिक्षा देने के लिए सन 1860 से कार्यरत है।

जिन्होंने भारत के गरीब लोगो को उच्च शिक्षा एवम स्वास्थ्य सेवाए देने हेतु 1912 में उत्तर प्रदेश के झांसी,फतेहपुर, प्रयागराज एवम कानपुर में अस्पताल एवम स्कूल की स्थापना की।
आजादी के बाद भारतीय संविधान के अनुसार उन्होंने यहां के अस्पताल एवम समस्त संपत्ति के संचालन हेतु एक संस्था (वूमेन यूनियन मिशनरी सोसाइटी) गठित की जो झांसी रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड है तथा वर्तमान में युनाइटेड फेलोशिप फोर क्रिश्चियन सर्विसेज (UFCS) के नाम से पंजीकृत है।
और इसके परिचालन के लिए एक कमेटी गठित की।जिसके अध्यक्ष को इसके संचालन की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई। जो कि एक भारतीय है।
इसी बात का फायदा उठाकर इस कमेटी के अध्यक्ष ने Interserve USA संस्था की जमीनें बेचना शुरू कर दिया और जब मूल संस्था ने इसका विरोध करते हुए अपना कब्जा वापिस मांगा तो इन्होंने इनकार कर दिया। और आज भी लगातार इस संस्था की जमीन बेची जा रही है।
इस संस्था कि संपत्ति की कुल अनुमानित मूल्य 1000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।

सबसे बड़ा प्रश्न है कि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था जो लोगो के भले के लिए काम कर रही थी उसकी संपत्ति पर कब्जा हुआ और आज तक प्रशासन सिर्फ तमाशा देखती रहा
। आज भी एक विदेशी समाज सेवी संस्था की जमीन लगातार बेची जा रही है । क्या इससे हमारे देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धब्बा नहीं लगेगा।
क्या फिर कोई समाज सेवी संस्था भारत के लोगो के लिए आगे आएगी।
दुनिया क्या सोचेगी की भारत में भ्रष्टाचार आज भी हर जगह व्याप्त है।
व्यक्तिगत रूप से मैंने कई बार उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा, जन सुनवाई पर भी डाला।
वहां से जांच आरंभ होते हुए जिलाधिकारी तक ईमानदारी से आती है और वहा से जो भी जांच अधिकारी आता है उसे किसी न किसी लालच के द्वारा अपने पक्ष में करके वो लोग बच जाते है ।
 ये मामला सिर्फ एक संपत्ति का नहीं बल्कि देश की साख का भी  है। 

आज ये अस्पताल सिर्फ कागजों पर चलता है ताकि आगे भी जमीन बेचने में आसानी हो।
इस अस्पताल में पीढ़ियों से काम करने वाले कर्मचारी भूखे मर रहे है ।
7 महीनों से उन्हें तनख्वाह नहीं मिली। जमीन बेचकर जो भी पैसा आता है उसे संचालक अपने परिवार के विकास में लगा देते है।

अगर सच में ये नया भारत है तो आज भी भ्रष्टाचार इतना हावी क्यों है कि एक अंतरराष्ट्रीय समाज सेवी संस्था को सरकारी दफ्तरों मे जाकर न्याय की भीख मांगनी पड़ रही है। पर आज भी भ्रष्ट लोग स्वच्छंद घूम रहे है।
अगर आज भी न्याय की प्रतीक्षा में इंसानियत भ्रष्टाचार के आगे नतमस्तक है तो फिर इस नए भारत के लिए इतने त्याग और कुर्बानियां क्यों?
पिछले कुछ सालों में देश में  एक नई ऊर्जा सी आ गई।सारी दुनिया में भारत का सम्मान और गुणगान होने लगा।
पर क्या एक अंतरराष्ट्रीय संस्था  जो एक समाज सेवी संस्था है उसकी संपत्तियों पर कब्जे हो रहे  इससे देश की साख को बट्टा नहीं लगेगा।
आज जो गरीबों के लिए भगवान बनकर उनका इलाज करते थे वहीं आज अपनी संपत्तियों को वापिस पाने के लिए इधर से उधर भटक रहे।
परिणाम चाहे जो भी हो पर यकीनन हमारे सिस्टम में अभी भी बहुत हद तक सुधार की जरूरत है।




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